लाइकन प्रिंस का पिल्ला

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अध्याय 409

वायलेट

मैं दौड़ी।

वायलेट होकर नहीं, ख़ून की संतान होकर नहीं।

बल्कि लूमिया बनकर।

थोड़ी मनुहार के बाद, पहले काइलन मुझे पास ही के जलप्रपात तक लेकर आया था। वहाँ से हम दोनों ने रूप बदला और जंगल के भीतर चले गए।

इस बार रूप बदलना बहुत सहज लगा। न कोई हिचक, न डर, बस हड्डियों के फैलने का संतोषभरा एहस...

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